law of attraction in hindi




Law of attraction


"आकर्षण का सार"

अगर आप इस सारांश को देख रहे हैं, तो आप वह शख्स हैं जो अपने जीवन में पूर्णता और सफलता की दिशा में कदम से कदम मिलाकर बढ़ना चाहते हैं। "आकर्षण का सिद्धांत" एक ऐसी ऊर्जा से भरा हुआ है जिसमें सपनों को हकीकत में बदलने की राह दिखाई जाती है।cleck here -law of arrraction book in hindi

"यह सारांश किसे लाभान्वित कर सकता है?"

  • उन लोगों के लिए जो अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्सुक हैं।
  • जो अपने सपनों को साकार बनाने के लिए नए दृष्टिकोण की तलाश में हैं।
  • जो अपनी सोच और आचरण को सकारात्मक बनाने के लिए तैयार हैं।

"इस सारांश का मुख्य उद्देश्य"

  • आपको सोचने का नया तरीका सिखाना।
  • आपकी सोच और भावनाओं को सकारात्मक रूप में परिवर्तित करने की प्रेरणा प्रदान करना।
  • आपको आत्म-समर्पण और निष्ठा के माध्यम से आकर्षण की शक्ति में वृद्धि करना।

"कैसे पढ़ें या इसे अपने जीवन में लागू करें?"

  • हर अध्याय को ध्यानपूर्वक पढ़ें और उसकी गहराईयों को समझें।
  • निरंतर आत्म-मौन और समर्पण से यह सारांश अपनाएं।
  • आत्म-निगरानी और सच्चाई के माध्यम से अपनी सोच को स्वीकारें और सुधारें।

इस सारांश का पालन करके, आप नए सपनों की ऊँचाइयों की ओर बढ़ने के लिए एक सकारात्मक और सफल जीवन की ऊर्जा को अपना सकते हैं।


अध्याय 1: "आकर्षण का सिद्धांत का परिचय"

1.1 मुख्य विषयों का परिचय:

इस अध्याय में, हम पहले चरण में आकर्षण के मुख्य सिद्धांतों का परिचय प्राप्त करते हैं। यहां हम जानेंगे कि आकर्षण कैसे एक ऊर्जा प्रणाली है जो हमें उन चीजों की ओर आकर्षित करती है जो हम चाहते हैं, चाहे वे सकारात्मक या नकारात्मक हों।

1.2 भावनाएं और विचार:

यहां हम सीखेंगे कि हमारी भावनाएं और विचार कैसे हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। चेतना की इस शक्ति को समझकर हम यह जानेंगे कि हमारे मानसिक स्थिति और भावनाएं हमारे आसपास की वास्तविकता को कैसे सृष्टि करती हैं।

1.3 आकर्षण और लक्ष्य:

इस खंड में, हम समझेंगे कि आकर्षण कैसे हमें हमारे लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में प्रेरित करता है। हम यह भी देखेंगे कि कैसे हम अपने विचारों और भावनाओं को सही दिशा में ले जाकर अपने सपनों को हकीकत में बदल सकते हैं।

1.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम यह समझेंगे कि आकर्षण का सिद्धांत कैसे हमें सकारात्मक सोच और क्रियाएं करने के लिए प्रेरित करता है। हमें यहां समझाया जाएगा कि अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए हम कैसे अपने आत्मविश्वास को बढ़ा सकते हैं और कैसे अपने जीवन को सकारात्मक रूप में स्थापित कर सकते हैं।


अध्याय 2: "आत्म-संज्ञान और आकर्षण"

2.1 आत्म-संज्ञान का महत्व:

इस अध्याय में, हम आत्म-संज्ञान के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। आत्म-संज्ञान से तात्पर्य है अपने आत्मा को समझना, जानना और स्वीकार करना। हम देखेंगे कि यह कैसे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के मार्ग में मदद कर सकता है।

2.2 भावनाओं का प्रभाव:

इस खंड में, हम यह जानेंगे कि आत्म-संज्ञान कैसे हमारी भावनाओं को निर्देशित करने में मदद करता है। हमारे मानसिक स्थिति और भावनाएं हमारी आत्मा को कैसे प्रभावित करती हैं और इसका आकर्षण के साथ कैसा संबंध है।

2.3 आत्म-नियंत्रण:

इस अध्याय में, हम आत्म-नियंत्रण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझेंगे। यह बताएगा कि आत्म-नियंत्रण से हम कैसे अपने विचारों, भावनाओं, और क्रियाओं पर नियंत्रण पा सकते हैं, जिससे हमारा आत्म-संज्ञान और आकर्षण मजबूत होता है।

2.4 समापन:

इस अध्याय के अंत में, हम आत्म-संज्ञान और आकर्षण के बीच के संबंध को सारांशित करेंगे। हम यह समझेंगे कि अपने आत्मा को समझना और स्वीकार करना हमें कैसे सकारात्मक दिशा में ले जा सकता है और आकर्षण की शक्ति को अपने जीवन में कैसे बढ़ावा दे सकता है।


अध्याय 3: "आकर्षण में उत्साह और सहारा"

3.1 उत्साह का महत्व:

इस अध्याय में, हम आकर्षण के साथ उत्साह के महत्वपूर्ण संबंधों पर विचार करेंगे। उत्साह कैसे हमारे लक्ष्यों की प्राप्ति में हमारी प्रेरणा को बढ़ावा देता है और हमें आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।

3.2 सहारा और समर्थन:

यह खंड हमें यह बताएगा कि सहारा और समर्थन कैसे हमें हमारे सपनों की ओर बढ़ने के लिए एक अद्वितीय साथी के रूप में कार्य कर सकते हैं। इसमें दोस्तों और परिवार के समर्थन का महत्वपूर्ण रोल हो सकता है।

3.3 सकारात्मक विचारशीलता:

इस अध्याय में, हम सकारात्मक विचारशीलता के महत्वपूर्णता को समझेंगे। यह बताएगा कि हमें कैसे अपने विचारों को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए, ताकि हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सकें।

3.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम उत्साह और सहारा के साथ आकर्षण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में देखेंगे। यह बताएगा कि हमें अपने सपनों की प्राप्ति के लिए आत्मविश्वास और समर्थन कैसे एक सकारात्मक जीवन में बदल सकते हैं।


अध्याय 4: "आत्म-निरीक्षण और समर्थन"

4.1 आत्म-निरीक्षण का महत्व:

इस अध्याय में, हम आत्म-निरीक्षण के महत्वपूर्ण तत्वों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। आत्म-निरीक्षण से हम अपने विचारों, भावनाओं, और क्रियाओं को समझने का और सुधारने का क्षमतानुप्राण में आते हैं, जिससे हमारा आकर्षण मजबूत होता है।

4.2 समर्थन का अभ्यास:

यह खंड हमें यह सिखाएगा कि समर्थन कैसे हमारे लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकता है। इसमें अपने आसपास के लोगों के साथ सहयोग करने के तरीके और समर्थन प्रदान करने के महत्वपूर्ण आदान-प्रदान का भी विवेचन होगा।

4.3 सकारात्मक सोच और समर्थन:

इस अध्याय में, हम सकारात्मक सोच के साथ समर्थन के बीच के संबंध पर विचार करेंगे। यह बताएगा कि सकारात्मक मानसिकता कैसे हमें समर्थन प्राप्त करने में सहारा प्रदान करती है और हमारे आकर्षण को कैसे मजबूत करती है।

4.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम आत्म-निरीक्षण और समर्थन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह बताएगा कि हम अपने आत्म-विकास के माध्यम से कैसे आकर्षण की ऊर्जा को सही दिशा में प्रेरित कर सकते हैं और समर्थन का सही तरीके से उपयोग कैसे कर सकते हैं।


अध्याय 5: "आकर्षण में संकुचन और निरक्षरता"

5.1 संकुचन का महत्व:

इस अध्याय में, हम संकुचन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर गहराई से विचार करेंगे। संकुचन कैसे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में एकाग्रचित्त करता है और हमारी ऊर्जा को एक निश्चित दिशा में कैसे प्रवृत्ति करता है, इस पर विचार करेंगे।

5.2 निरक्षरता और सीमित सोच:

इस खंड में, हम निरक्षरता और सीमित सोच के बीच के संबंध पर चर्चा करेंगे। यह हमें दिखाएगा कि आकर्षण की ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए हमें अपनी सोच को कैसे विस्तारित करना होता है और सीमित सोच से कैसे बाहर निकलना होता है।

5.3 सकारात्मक मानसिकता की अभ्यास:

इस अध्याय में, हम सकारात्मक मानसिकता की अभ्यास के महत्वपूर्ण तत्वों पर बातचीत करेंगे। हम यह समझेंगे कि सकारात्मक मानसिकता को कैसे बनाए रखा जा सकता है और इससे कैसे आकर्षण की शक्ति में वृद्धि होती है।

5.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम संकुचन और निरक्षरता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि अपनी सोच को कैसे परिवर्तित करके हम अपने आकर्षण को सकारात्मक रूप में बनाए रख सकते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में कैसे बढ़ सकते हैं।


अध्याय 6: "आकर्षण में सही उदाहरण और उत्तेजना"

6.1 सही उदाहरणों का चयन:

इस अध्याय में, हम सीखेंगे कि सही उदाहरणों का चयन कैसे हमारे आकर्षण को प्रभावित कर सकता है। यह बताएगा कि अपने प्रेरक और सफल व्यक्तियों से कैसे हमें सीखना चाहिए ताकि हम भी अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकें।

6.2 उत्तेजना का महत्व:

इस खंड में, हम उत्तेजना के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को समझेंगे। यह बताएगा कि कैसे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में ऊर्जा और उत्साह बनाए रखने के लिए उत्तेजना का सही तरीके से उपयोग करना चाहिए।

6.3 आत्म-समर्पण और निष्ठा:

इस अध्याय में, हम आत्म-समर्पण और निष्ठा के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर गौर करेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित रहने और निष्ठा बनाए रखने से कैसे हम अधिक सकारात्मक आकर्षण बना सकते हैं।

6.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम आकर्षण में सही उदाहरण और उत्तेजना के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि अपने लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए उत्तेजित और सकारात्मक रूप से कैसे काम किया जा सकता है।

अध्याय 7: "आत्म-सुधारणा और स्थिरता"

7.1 आत्म-सुधारण का परिचय:

इस अध्याय में, हम आत्म-सुधारण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों का परिचय प्राप्त करेंगे। आत्म-सुधारण से तात्पर्य है अपने आत्मा को सुधारने का प्रक्रियात्मक क्रम, जिससे हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

7.2 स्थिरता के सिद्धांत:

इस खंड में, हम स्थिरता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। स्थिरता कैसे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकती है, इसे जानने के लिए हम यहां विचार करेंगे।

7.3 आत्म-निगरानी और सच्चाई:

इस अध्याय में, हम आत्म-निगरानी और सच्चाई के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर चर्चा करेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि कैसे अपनी सोच, भावनाएं, और क्रियाएं सही दिशा में ले जाकर हम अपने आकर्षण को सुधार सकते हैं।

7.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम आत्म-सुधारणा और स्थिरता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि अपने आत्मा को सुधारने और स्थिरता बनाए रखने के माध्यम से हम अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में कैसे सफल हो सकते हैं।


अध्याय 8: "संयम और समर्पण"

8.1 संयम का महत्व:

इस अध्याय में, हम संयम के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर विचार करेंगे। संयम से मतलब है अपने विचारों, भावनाओं, और क्रियाओं पर नियंत्रण बनाए रखना, जिससे हम अपने आकर्षण को सांजीवनी दे सकते हैं।

8.2 समर्पण का महत्व:

इस खंड में, हम समर्पण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर बातचीत करेंगे। समर्पण से तात्पर्य है अपने लक्ष्यों के प्रति पूर्ण समर्पण, जो हमें सफलता की ऊर्जा में बढ़ावा देता है।

8.3 आत्म-नियंत्रण की अभ्यास:

इस अध्याय में, हम आत्म-नियंत्रण के महत्वपूर्ण तत्वों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि कैसे हम अपनी इच्छा शक्ति को सही दिशा में प्रवृत्ति करने के लिए अपने मन को नियंत्रित कर सकते हैं।

8.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम संयम और समर्पण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि इन गुणों के माध्यम से हम अपने आकर्षण को मजबूती दे सकते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


अध्याय 9: "सकारात्मक मानसिकता और सफलता"

9.1 सकारात्मक मानसिकता का महत्व:

इस अध्याय में, हम सकारात्मक मानसिकता के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। सकारात्मक मानसिकता कैसे हमें सफलता की ऊर्जा प्रदान करती है और हमारे आकर्षण को कैसे प्रभावित करती है, इस पर हम गहराई से विचार करेंगे।

9.2 सकारात्मक मानसिकता के लाभ:

इस खंड में, हम सकारात्मक मानसिकता के लाभों पर विचार करेंगे। यह हमें यह बताएगा कि सकारात्मक मानसिकता कैसे हमें सफलता की ऊर्जा से भर देती है और कैसे यह हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में मदद कर सकती है।

9.3 सकारात्मक मानसिकता कैसे बनाए रखें:

इस अध्याय में, हम सकारात्मक मानसिकता को कैसे बनाए रख सकते हैं, इस पर विचार करेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि अपनी सोच और दृष्टिकोण को कैसे सकारात्मक बनाए रखने के लिए कुछ आसान तकनीकों का अनुसरण कैसे कर सकते हैं।

9.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम सकारात्मक मानसिकता और सफलता के सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि इस मानसिकता को बनाए रखकर हम अपने आकर्षण को मजबूत कैसे बना सकते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता कैसे प्राप्त कर सकते हैं।


अध्याय 10: "सफलता की ऊर्जा और आकर्षण"

10.1 सफलता की ऊर्जा का परिचय:

इस अध्याय में, हम सफलता की ऊर्जा के महत्वपूर्ण सिद्धांतों का परिचय प्राप्त करेंगे। सफलता की ऊर्जा कैसे हमें अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सहायक हो सकती है, इस पर विचार करेंगे।

10.2 आकर्षण की ऊर्जा:

इस खंड में, हम आकर्षण की ऊर्जा के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। यह हमें बताएगा कि कैसे हम अपने सपनों को आकर्षित करने के लिए ऊर्जा को सही दिशा में कैसे प्रवृत्ति कर सकते हैं।

10.3 सफलता की ऊर्जा कैसे बनाए रखें:

इस अध्याय में, हम सफलता की ऊर्जा को कैसे बनाए रख सकते हैं, इस पर विचार करेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि कैसे हम अपनी मेहनत, समर्पण, और उत्साह को बनाए रखकर सफलता की ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं।

10.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम सफलता की ऊर्जा और आकर्षण के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि ऊर्जा को सही तरीके से प्रवृत्ति करके हम अपने आकर्षण को मजबूती दे सकते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


अध्याय 11: "सहायक सोच और सहयोग"

11.1 सहायक सोच का महत्व:

इस अध्याय में, हम सहायक सोच के महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। सहायक सोच से तात्पर्य है अपनी सोच को सकारात्मक और सहायक बनाए रखना, जो हमें अपने आकर्षण को प्रभावित करने में सहायक हो सकता है।

11.2 सहयोग के लाभ:

इस खंड में, हम सहयोग के लाभों पर विचार करेंगे। सहयोग कैसे हमारे लक्ष्यों की प्राप्ति में हमें समर्थ बना सकता है, इस पर हम गहराई से विचार करेंगे।

11.3 सहयोग कैसे प्राप्त करें:

इस अध्याय में, हम यह जानेंगे कि सहयोग कैसे प्राप्त किया जा सकता है। यह हमें बताएगा कि कैसे हम अपने आसपास के लोगों से सहायता प्राप्त करके अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफल हो सकते हैं।

11.4 समापन:

इस अध्याय के समापन में, हम सहायक सोच और सहयोग के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को संक्षेप में समझेंगे। यह हमें यह सिखाएगा कि सकारात्मक सोच और सहायता से हम अपने आकर्षण को मजबूती दे सकते हैं और अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।


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